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अजमेर के चौहान वंश का इतिहास (ajmer ke chauhan vansh)

अजमेर का चौहान वंश-

  • अन्य नाम- शाकंभरी के चौहान सपादलक्ष्य के चौहान , जांगल प्रदेश के चौहान
  • लगभग 551 ईस्वी के आसपास वासुदेव चौहान ने चौहान वंश की स्थापना की। 
  • सर्वप्रथम जांगल प्रदेश में सत्ता स्थापित हुई अतः जांगल प्रदेश के चौहान कह लाए। 
  • चौहान शाकंभरी माता की अर्चना करते थे शाकंभरी के चौहान कह लाए। 
  • शाकंभरी माता के 3 मंदिर हैं- सांभर जयपुर , उदयपुरवाटी झुंझुनू, सहारनपुर यूपी। 
  • चौहान राज्य में कुल सवा लाख गांव थे अतः सपाद लक्ष्य के चौहान कह लाए। 
  • इन्हें सर्वाधिक प्रसिद्दि अजमेर से मिली थी अजमेर के चौहान कह लाए। 
  • आरंभिक राजधानी - अहि छत्रपुर। 
  • मान्यता है कि चौहान प्रारंभ में गुर्जर प्रतिहारों के सामंत रहे लगभग 10 वीं सदी में सिंहराज चौहान प्रति हारो की सत्ता से मुक्त हुआ। 

चंद्रराज-

  • इसकी रानी आत्मप्रभा योगिक क्रिया से निपुण महिला थी। 
  • यह पुष्कर झील में प्रतिदिन 1000 दीपक जलाकर भगवान शिव की पूजा करती थी। 


राजस्थान की प्राचीन सभ्यता

राजस्थान में संभागीय व्यवस्था 


विग्रहराज द्वितीय  -

  • इसने गुजरात के चालुक्य राजा मूलराज द्वितीय को हराया फिर भंडोच मैं अपनी कुलदेवी आशापुरा माता का मंदिर बनवाया। 

अजय पाल चौहान (1105-1133)

  • सातवीं शताब्दी में चौहान वंश में अजय राज नामक वंश का उल्लेख आता है जिसे गलती से अजय राजा जयपाल कहां जाता है जबकि अजय पाल का वास्तविक काल 1105 से 1133 का है।  
  • अजय पाल ने 1133 ईस्वी में अजमेर नगर की स्थापना की। 
  • अजय पालने  अजय मेरु दुर्ग का निर्माण अजमेर में करवाया जिसे  वर्तमान में तारागढ़ के नाम से जाना जाता है। 
  • अजय पाल के शासन कल में चौहानों ने अजमेर को अपनी नई राजधानी बनाया। 
  • पृथ्वीराज विजय ग्रंथ में अजमेर की तुलना स्वर्ग की इंद्रपुरी से की गई है। 
  • अजय देव के नाम से चांदी के सिक्के चलाए। 
  • इसकी रानी सोमलेखा के नाम पर सिक्के चलाएं अंत में संन्यास लेकर पुष्कर गए। 
तराइन का प्रथम युद्ध

अर्णोंराज चौहान (1133-1153)

  • उपनाम -आना जी
  • अर्णोराज ने पुष्कर में वराह मंदिर का निर्माण करवाया।  
  • अर्णोराज ने  अजमेर की आनासागर झील का निर्माण करवाया। 
  • आनासागर झील के किनारे दौलत बाग का निर्माण जहांगीर ने करवाया। 
  • बारादरी शाहजहां ने बनवाई। 
  • अर्णोंराज ने एक तुर्क आक्रमण का विरोध किया जिससे आना सागर रक्त से लाल हो गई थीं।  
  • अर्णोंराज की हत्या इसके पुत्र जगदेव ने की तथा कुछ समय शासन किया। 
  • इसके बाद अर्णोंराज का योग्य पुत्र विग्रहराज चौहान शासक बना। 

विग्रहराज चौहान चतुर्थ (1153-1163)

  • उपनाम - बीसलदेव चौहान
  • स्रोत - बीसलदेव रासो - नरपति नालह द्वारा रचित
  • ललित विग्रहराज- सोमदेव
  • हरिकेली- स्वयं द्वारा रचित
  • स्थापत्य- बीसलपुर झील अजमेर के समीप
  • बीसलपुर नगर टोंक
  • बीसलपुर बांध का आरंभिक निर्माण
  • बीसलपुर में गोकर्णेश्वर मंदिर का निर्माण करवाया। 
  • सरस्वती कठाभरण- संस्कृत विश्वविद्यालय का निर्माण अजमेर में करवाया जिसे कुतुबुद्दीन ऐबक ने  तोड़कर ढाई दिन का झोपड़ा का निर्माण करवाया। 
  • विग्रहराज ने दिल्ली के तोमर शासक को परास्त किया और दिल्ली को चौहानों की नई राजधानी बनाया। 
  • विग्रहराज ने दिल्ली शिवालिक स्तंभ के अनुसार हिमालय से लेकर विद्यांचल तक कर वसूला। 
  • डाई दिन का झोपड़ा पर फारसी का खुदा हुआ फारसी अभिलेख है जिसमें स्वरस्वती कठाभरण को तोड़ने वालों के नाम है। 
  • साहित्यकारों का आश्रय दाता होने के कारण विग्रहराज कवि बांधव कहलाता था। 
  • सोमदेव ने विग्रहराज को विद्वानों में प्रथम कहां है। 
  • विग्रहराज ने स्वयं हरि अकेली संस्कृत नाटक की रचना की जो भारवी किरातार्जुनीयम् ग्रंथ पर आधारित है। 
  • प्रसिद्ध विद्वान किनहोर्न ने लिखा है यही ऐसा राजा  है जो साहित्य में कालिदास की होड़ कर सकता है। 
    पृथ्वीराज चौहान तृतीय

पृथ्वीराज चौहान तृतीय (1177-1192)

  • उपनाम - रामपिथौरा पृथ्वीराज रासो से, दलपुंगल विश्व विजेता। 
  • जन्म- अनिहल पाटन गुजरात
  • माता पिता- कर्पूरी देवी और सोमेश्वर
  • पुत्र गोविंद राज चौहान
  • स्रोत पृथ्वीराज रासो चंद्रवरदाई द्वारा रचित। 
  • पृथ्वीराज विजय जयानक भट्ट
  • पृथ्वीराज चौहान ने सर्वप्रथम अपने चाचा अपरगांगेय व नागार्जुन के विद्रोह का दमन किया। 
  • पंजाब की भंडानक जनजाति का दमन किया तथा तवरहिंद को अपनी उत्तरी सीमा बनाया। 
  • 1182 में महोबा के चंदेल शासक परमार देव को परास्त किया एवं उसके सेनापति आल्हा ऊदल की हत्या की तथा पंजूनराय को महोबा का प्रबंधक नियुक्त किया। 
  • 1187 में गुजरात के चालू के शासक भीम द्वितीय को परास्त किया। 
  • कन्नौज के गढ़वाल शासक जयचंद की पुत्री संयोगिता से विवाह कर अपना प्रभाव स्थापित किया। 


तराइन का प्रथम युद्ध-1191-

  • पृथ्वीराज v/s मोहम्मद गौरी
  • तराइन वर्तमान में करनाल जिला हरियाणा में स्थित है। 
  • तराइन को तारा बाड़ी का मैदान भी कहा जाता है। 
  • 1191 में  मोहम्मद गौरी द्वारा पृथ्वीराज के सीमा क्षेत्र तवर हिंद के किले पर अधिकार करना इस युद्ध का प्रधान कारण माना जाता है। 
  • पृथ्वीराज के सेनापति गोविंद राज तोमर के बाले से गोरी जख्मी हो गया तथा पराजित होकर भागा। 
  • यह पृथ्वीराज की गौरी के विरुद्ध प्रथम व अंतिम विजय रही। 
  • गौरी का जिंदा बच कर जाना उसकी भागती सेना का पीछा न करना पृथ्वीराज चौहान की ऐतिहासिक भूल मानी जाती है। 

तराइन का द्वितीय युद्ध 1192-

  • इस बार गोरी ने एक षड्यंत्र किया अपने प्रतिनिधि किवाम उल मुल्क को एक झूठा संधि प्रस्ताव देकर पृथ्वीराज चौहान के दरबार में भेजा। 
  • पृथ्वीराज चौहान इस षड्यंत्र का शिकार हुआ तथा बहुत कम सेना लेकर तराइन पहुंचा। 
  • गौरी के अचानक आक्रमण से पृथ्वीराज पराजित हुआ तथा सिरसा नामक स्थान पर बंदी बनाया गया। 
  • पृथ्वीराज रासो के अनुसार पृथ्वीराज को अजमेर लाया गया। 
  • गौरी ने अजमेर के अजय मेरु दुर्ग में अपना दरबार लगाया। 
  • गौरी ने पृथ्वीराज के पुत्र गोविंद राज चौहान को अजमेर का अपना सामंत नियुक्त किया। 
  • पृथ्वीराज को बंदी बनाकर गजनी ले गया तथा अंधा करवाकर कारागार में डाल दिया गया। 
  • पृथ्वीराज के भाई हर राज चौहान ने गोविंद राज चौहान को अजमेर से हटाया तथा पुनः सत्ता कायम की। 
  • इस प्रकार हजराज चौहान अजमेर का अंतिम चौहान शासक बना। 



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